समझ नहीं आ रहा है कि लोग चाहते क्या हैं ? जिससे मिलो, जिससे बात करो बस एक ही रट लगाये रहता है, कि भाई शादी कब रहा है?? जरा देर आप चेटिंग कर लो, उसके बाद घूम फिर के वहीँ आ जाते हैं सारे, कि यार शादी कब कर रहा है, कर ले यार समय हो गया है! मन तो आता है कह दिया जाए कि भाईसाब आपका समय हो गया है आप चले यहाँ से!
अरे भाईसाब कोई इनसे पूछे कि भाई मेरी शादी से आपको करना क्या है?? अबे हमारे जीने का एक ही मतलब रह गया है क्या कि शादी कर लो! भाई कोई इनसे पूछे कि हमने शादी करने के लिए ही जन्म लिया है क्या? और अगर कह भर दो कि अभी नहीं तो और लीजिये आप चार सवाल! कि भाई क्या समस्या है, जीवन से उदास हो क्या?? मन तो आता है कि कह दिया जाए कि ओ भाई जा ना यार अपना काम कर क्यों पीछे पड़ा है तो लीजिये एक धमाकेदार सवाल : भाई एड्स तो नहीं हो गया ?? अब ये आपकी दुनिया में घुस जायेगे , आपको क्या क्या समस्या हैं, क्या नहीं हैं, सब बताओ इनको।
अब आते हैं घर पे! आपकी उम्र २५ हुई नहीं कि घर पे आपकी खबर लेनी शुरू हो जाती है। आप घर पहुचिये और अगले ही दिन सुबह घर वाले आपसे पूछेगे कि बेटा कब करेगा शादी?? कैसी लड़की चाहिए ? थोडा न नुकुर कि नहीं कि प्रसिद्द कहावत सुन लीजिये आप फिर कि " बेटा शादी सही समय पर कर लेने से सारे काम सही समय पे हो जाते हैं।" और अगर आपने बोल दिया कि अभी वो समय नहीं आया तो लीजिये एक और कि "आजकल के बच्चे तो माँ बाप कि सुनते नहीं हैं।" इसके बाद तो हो गया आपका कल्याण, फिर तो भगवान् ही आपका सारा दिन मंगलमय कर सकते हैं।
आप घर पे कही बैठे कुछ सोच रहे होगे, तभी आपकी माता जी आके पूछेगी कि बेटा कही कोई है तो नहीं! अगर बोलो- नहीं है तो अंदर से लगता है कि जैसे हमें कही डूब मरना चाहिए (ये मात्र मजाक है) और अगर कहा कि- है, तो तुरंत कि बेटा तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। ये शादी नहीं हो पायेगी!
अब मान लिया जाए कि उम्र २७-२८ हो गयी है तो घर पे अब नए सवाल होगे कि बेटा अगर सही में कोई लड़की है तो बता दो, बस अपने जाति कि होनी चाहिए! इसी बीच आप अगर थोडा ज्यादा समय के लिए घर गए हैं तो हो सकता है शायद कि आपको ४-५ लडकियां दिखा दी जाए और अगर आपने कहाँ नहीं ये नहीं तो सुनिये " बेटा ऐसे तुम शादी नहीं कर पाओगे। " फिर आप वही सब बताइये कि आपको कैसी लड़की चाहिए, जॉब वाली चाहिए या बिना जॉब वाली चाहिए। जैसे ही आप अपनी ये कठिन यात्रा निपटा के वापस घर से निकलेगे तो एक नया ऑफर आपको दिया जाएगा कि आप मेट्रोमोनियल साइट्स पे ढून्ढ लो और हमें बता दो।
और सबसे खतरनाक वो मित्र हैं आपके जो ये शादी के बवाल से निपट चुके हैं। और वो खुश हो या न हो पर अविवाहित मित्र से सिर्फ ये बतायेगे कि यार मैं तो काफी खुश हूँ। और जब आपके माँ-बाप आपसे मिलने कभी आयेगे तो ये आके खड़े हो जायेगे और बोलगे कि "आंटी कब करा रही हैं शादी, हमसे तो बोलता रहता है कि घर वाले कोई बात ही नहीं करते इस मामले में।" उसके बाद देखिये आप कमाल, वही के वही आपकी माता जी बातों ही बातों में आपको दस लड़कियों के नाम बता देंगी जो कि आपके किसी दूर के रिश्तेदार के दूर के रिश्तेदार की लड़की होगी। या फिर आप सुन लीजिये उन दस लड़को के नाम जिन्होंने अभी शादी करी है और वो आपके हमउम्र या आपसे २-३ साल बड़े या छोटे हैं। वैसे आपके ये मित्र ख़ास तौर पे तब जरूर मिलने आते हैं जब आपके माता पिता आये हुए हो और उन्हें इस बात का पूरा विश्वास रहता है कि इन्हे इसमें भर पूर मज़ा मिलने वाला है।
खैर अगर आप माँ बाप की नज़र से देखे तो वो चाहते हैं कि वो अपने जीवित रहते हुए अपने बच्चो के शादी व्याह निपटा के फुर्सत हो जाए जो कि उनकी नज़र में सही है। लेकिन भाई उनकी इस ख़ुशी हमारे लिए कितनी समस्याए लेकर आएगी इसका उनको अंदाज़ा नहीं है या अगर है तो वो सोचते हैं कि समय के साथ सब सही हो जाएगा।
वैसे आप अपने माता पिता से पूछ के देखे कि भाई जब हैम १० -१२ में पढ़ते थे तब तो हमारा किसी लड़की से बात करना या किसी लड़की से फ़ोन पे बात कर लेना गवारा नहीं था और अब जब शादी का मामला आ गया है तो शायद ये खुद ही आपको लड़की का नंबर दे दे या आपको कॉल करने के लिए प्रोत्साहित करे। क्यों भाई ऐसा क्यों , बच्चे को उसी समय छूट दी गयी होती तो अब तो शायद खुद वो शादी को लेकर आपके आगे पीछे दौड़ रहा होता जैसे कि हमारे सारे रात में फ्री टॉक टाइम वाले मित्र करते हैं।
वैसे सब कि जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब वो खुद ही समझ जाता है कि अब मैं शादी के लिए तैयार हूँ। बस ये समाज है और उसके वो तथाकथित चार लोग हैं जो आपके जीवन को नरक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ये चार लोग आपको कभी नहीं मिलते ये हमेशा मिलते हैं आपके परिवार वालों को। और मजे कि बात ये है कि आपके परिवार पर इन तथाकथित चार लोगों का इतना प्रभाव होता है जितना कि आपका खुद नहीं होता। यही चार लोग आपकी उम्र निर्धारित करते हैं कि आप शादी के लायक हुए हैं या अभी भी नालायक हैं।
आशा करता हूँ कि ये चार लोगों को भगवान् सदबुद्धि दें और ये दूसरों कि उम्र निर्धारित करना छोड़ दें। उन मित्रो का भी धन्यवाद देता हूँ जो समय समय पे याद दिलाते रहते हैं कि भाई तुझे अब शादी कर लेनी चाहिए। इसी के साथ मैं अपनी वाणी ओह नहीं कलम ,नहीं नहीं, की-बोर्ड को विराम देता हूँ।
* नोट : इस ब्लॉग से कतई ये मतलब न निकाला जाए कि मैं शादी नहीं करने वाला हूँ। इस को पढ़ने वाली अगर कोई भी लड़की अगर शादी में अपनी रूचि रखती है तो नि:संकोच मुझसे सीधा संपर्क साध सकती है।
अरे भाईसाब कोई इनसे पूछे कि भाई मेरी शादी से आपको करना क्या है?? अबे हमारे जीने का एक ही मतलब रह गया है क्या कि शादी कर लो! भाई कोई इनसे पूछे कि हमने शादी करने के लिए ही जन्म लिया है क्या? और अगर कह भर दो कि अभी नहीं तो और लीजिये आप चार सवाल! कि भाई क्या समस्या है, जीवन से उदास हो क्या?? मन तो आता है कि कह दिया जाए कि ओ भाई जा ना यार अपना काम कर क्यों पीछे पड़ा है तो लीजिये एक धमाकेदार सवाल : भाई एड्स तो नहीं हो गया ?? अब ये आपकी दुनिया में घुस जायेगे , आपको क्या क्या समस्या हैं, क्या नहीं हैं, सब बताओ इनको।
अब आते हैं घर पे! आपकी उम्र २५ हुई नहीं कि घर पे आपकी खबर लेनी शुरू हो जाती है। आप घर पहुचिये और अगले ही दिन सुबह घर वाले आपसे पूछेगे कि बेटा कब करेगा शादी?? कैसी लड़की चाहिए ? थोडा न नुकुर कि नहीं कि प्रसिद्द कहावत सुन लीजिये आप फिर कि " बेटा शादी सही समय पर कर लेने से सारे काम सही समय पे हो जाते हैं।" और अगर आपने बोल दिया कि अभी वो समय नहीं आया तो लीजिये एक और कि "आजकल के बच्चे तो माँ बाप कि सुनते नहीं हैं।" इसके बाद तो हो गया आपका कल्याण, फिर तो भगवान् ही आपका सारा दिन मंगलमय कर सकते हैं।
आप घर पे कही बैठे कुछ सोच रहे होगे, तभी आपकी माता जी आके पूछेगी कि बेटा कही कोई है तो नहीं! अगर बोलो- नहीं है तो अंदर से लगता है कि जैसे हमें कही डूब मरना चाहिए (ये मात्र मजाक है) और अगर कहा कि- है, तो तुरंत कि बेटा तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। ये शादी नहीं हो पायेगी!
अब मान लिया जाए कि उम्र २७-२८ हो गयी है तो घर पे अब नए सवाल होगे कि बेटा अगर सही में कोई लड़की है तो बता दो, बस अपने जाति कि होनी चाहिए! इसी बीच आप अगर थोडा ज्यादा समय के लिए घर गए हैं तो हो सकता है शायद कि आपको ४-५ लडकियां दिखा दी जाए और अगर आपने कहाँ नहीं ये नहीं तो सुनिये " बेटा ऐसे तुम शादी नहीं कर पाओगे। " फिर आप वही सब बताइये कि आपको कैसी लड़की चाहिए, जॉब वाली चाहिए या बिना जॉब वाली चाहिए। जैसे ही आप अपनी ये कठिन यात्रा निपटा के वापस घर से निकलेगे तो एक नया ऑफर आपको दिया जाएगा कि आप मेट्रोमोनियल साइट्स पे ढून्ढ लो और हमें बता दो।
और सबसे खतरनाक वो मित्र हैं आपके जो ये शादी के बवाल से निपट चुके हैं। और वो खुश हो या न हो पर अविवाहित मित्र से सिर्फ ये बतायेगे कि यार मैं तो काफी खुश हूँ। और जब आपके माँ-बाप आपसे मिलने कभी आयेगे तो ये आके खड़े हो जायेगे और बोलगे कि "आंटी कब करा रही हैं शादी, हमसे तो बोलता रहता है कि घर वाले कोई बात ही नहीं करते इस मामले में।" उसके बाद देखिये आप कमाल, वही के वही आपकी माता जी बातों ही बातों में आपको दस लड़कियों के नाम बता देंगी जो कि आपके किसी दूर के रिश्तेदार के दूर के रिश्तेदार की लड़की होगी। या फिर आप सुन लीजिये उन दस लड़को के नाम जिन्होंने अभी शादी करी है और वो आपके हमउम्र या आपसे २-३ साल बड़े या छोटे हैं। वैसे आपके ये मित्र ख़ास तौर पे तब जरूर मिलने आते हैं जब आपके माता पिता आये हुए हो और उन्हें इस बात का पूरा विश्वास रहता है कि इन्हे इसमें भर पूर मज़ा मिलने वाला है।
खैर अगर आप माँ बाप की नज़र से देखे तो वो चाहते हैं कि वो अपने जीवित रहते हुए अपने बच्चो के शादी व्याह निपटा के फुर्सत हो जाए जो कि उनकी नज़र में सही है। लेकिन भाई उनकी इस ख़ुशी हमारे लिए कितनी समस्याए लेकर आएगी इसका उनको अंदाज़ा नहीं है या अगर है तो वो सोचते हैं कि समय के साथ सब सही हो जाएगा।
वैसे आप अपने माता पिता से पूछ के देखे कि भाई जब हैम १० -१२ में पढ़ते थे तब तो हमारा किसी लड़की से बात करना या किसी लड़की से फ़ोन पे बात कर लेना गवारा नहीं था और अब जब शादी का मामला आ गया है तो शायद ये खुद ही आपको लड़की का नंबर दे दे या आपको कॉल करने के लिए प्रोत्साहित करे। क्यों भाई ऐसा क्यों , बच्चे को उसी समय छूट दी गयी होती तो अब तो शायद खुद वो शादी को लेकर आपके आगे पीछे दौड़ रहा होता जैसे कि हमारे सारे रात में फ्री टॉक टाइम वाले मित्र करते हैं।
वैसे सब कि जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब वो खुद ही समझ जाता है कि अब मैं शादी के लिए तैयार हूँ। बस ये समाज है और उसके वो तथाकथित चार लोग हैं जो आपके जीवन को नरक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ये चार लोग आपको कभी नहीं मिलते ये हमेशा मिलते हैं आपके परिवार वालों को। और मजे कि बात ये है कि आपके परिवार पर इन तथाकथित चार लोगों का इतना प्रभाव होता है जितना कि आपका खुद नहीं होता। यही चार लोग आपकी उम्र निर्धारित करते हैं कि आप शादी के लायक हुए हैं या अभी भी नालायक हैं।
आशा करता हूँ कि ये चार लोगों को भगवान् सदबुद्धि दें और ये दूसरों कि उम्र निर्धारित करना छोड़ दें। उन मित्रो का भी धन्यवाद देता हूँ जो समय समय पे याद दिलाते रहते हैं कि भाई तुझे अब शादी कर लेनी चाहिए। इसी के साथ मैं अपनी वाणी ओह नहीं कलम ,नहीं नहीं, की-बोर्ड को विराम देता हूँ।
* नोट : इस ब्लॉग से कतई ये मतलब न निकाला जाए कि मैं शादी नहीं करने वाला हूँ। इस को पढ़ने वाली अगर कोई भी लड़की अगर शादी में अपनी रूचि रखती है तो नि:संकोच मुझसे सीधा संपर्क साध सकती है।